कौन आया ?डा. नागेश पांडेय' संजय का गीत द्वार पर आहट हुई है, देख तो लो, कौन आया ? तड़पते मन की कसक की गंध शायद पा गया वह, उसे आना ही नहीं था मगर शायद आ गया वह। मुझे घबराहट हुई है, देख तो लो, कौन आया ? ज्योति यह कैसी ? बुझाने पर अधिक ही जगमगाई। यह फसल कैसी ? कि जितनी कटी, उतनी लहलहाई। प्रीति अक्षयवट हुई है, देख तो लो, कौन आया ? थम गईं शीतल हवाएँ, दग्ध उर बेहाल हैं जी। प्यास अब भी तीव्रतम है, पर नदी पर जाल है जी। आस सूना तट हुई है, देख तो लो, कौन आया ? क्यों जगत की वेदनाएँ पल रहीं मन के निलय में ? मधुर सपनों की चिताएँ जल रहीं जर्जर हृदय में। जिंदगी मरघट हुई है, देख तो लो, कौन आया ? जिंदगी की देहरी पर, मौत को रोके खड़ा हूँ। नयन तुझको देख भर लें, बस इसी जिद पर अड़ा हूँ। एक ही अब रट हुई है, देख तो लो, कौन आया ? कविडा. नागेश पांडेय 'संजय' |
Friday, April 15, 2011
डा. नागेश पांडेय' संजय का गीत
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डा. नागेश पांडेय 'संजय',
प्रेम रस,
साहित्यप्रेमी संघ
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6 comments:
अपक राह निहारती पलक ......
देख तो लो कौन आया .......!!
बहुत सुंदर अभुव्यक्ति
अपनी पोस्ट यहां देखें…………
http://tetalaa.blogspot.com/
सुंदर गीत, बधाई।
............
ब्लॉगिंग को प्रोत्साहन चाहिए?
आपकी उम्दा प्रस्तुति कल शनिवार (16.04.2011) को "चर्चा मंच" पर प्रस्तुत की गयी है।आप आये और आकर अपने विचारों से हमे अवगत कराये......"ॐ साई राम" at http://charchamanch.blogspot.com/
चर्चाकार:Er. सत्यम शिवम (शनिवासरीय चर्चा)
सभी शुभ चिंतकों को सादर आभार .
AAPKKI RACHANA BHAV BHEENI HAI
ACHCHHI RACHNA KE LIYE BADHAI
WAH ! wah!
ghotoo
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